हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के शिया धर्मशास्त्र विभाग के तत्वावधान में मौलाना आज़ाद लाइब्रेरी के कल्चरल हॉल में लेखिका शबीह ज़हरा हुसैनी कानूनपुरी की पुस्तक ‘हबलुल वदूद’ का विमोचन समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर विद्वानों ने पुस्तक के माध्यम से क़ुरआनी शिक्षाओं, तौहीद और मानव जीवन के विभिन्न पहलुओं को समझने के महत्व पर प्रकाश डाला।

समारोह में शिक्षाविदों, विश्वविद्यालय के अध्यापकों, विद्वानों और बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने भाग लिया।
पुस्तक ‘हबलुल वदूद’ में क़ुरआन की रोशनी में तौहीद के विभिन्न आयामों तथा मानव जीवन के अलग-अलग हालात और चरणों को समझने का प्रयास किया गया है। इसका उद्देश्य पाठकों को क़ुरआनी शिक्षाओं से परिचित कराना तथा उनकी धार्मिक और वैचारिक समझ को विकसित करना है।
प्रोफेसर निशात फ़ातिमा का स्वागतीय भाषण
समारोह का आरंभ मौलाना आज़ाद लाइब्रेरी की लाइब्रेरियन प्रोफेसर निशात फ़ातिमा के स्वागत भाषण से हुआ। उन्होंने उपस्थित अतिथियों का स्वागत करते हुए ज्ञान और जागरूकता के प्रसार में पुस्तकों तथा शैक्षणिक आयोजनों की भूमिका को रेखांकित किया।
उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि विश्वविद्यालय और पुस्तकालय केवल पुस्तकों के संग्रह तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे शोध, चिंतन और बौद्धिक विकास के महत्वपूर्ण केंद्र भी हैं।
डॉ. मिर्ज़ा शफ़ीक़ हुसैन शफ़क़ का संबोधन
समारोह के विशिष्ट अतिथि डॉ. मिर्ज़ा शफ़ीक़ हुसैन शफ़क़ ने अपने संबोधन में पुस्तक के शैक्षणिक और वैचारिक महत्व पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने धार्मिक एवं बौद्धिक विषयों पर गंभीर लेखन और शोध की आवश्यकता को रेखांकित किया।

उन्होंने कहा कि इस प्रकार की पुस्तकें पाठकों को केवल जानकारी प्रदान नहीं करतीं, बल्कि उन्हें क़ुरआनी शिक्षाओं के संदर्भ में मानव जीवन के बुनियादी प्रश्नों पर विचार करने के लिए भी प्रेरित करती हैं।
प्रोफेसर मौलाना असग़र एजाज़ क़ाएमी का शोधपत्र
कार्यक्रम का एक प्रमुख हिस्सा अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के शिया धर्मशास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर मौलाना असग़र एजाज़ क़ाएमी का विस्तृत शोधपत्र था। उन्होंने पुस्तक की विषयवस्तु, उसके क़ुरआनी संदर्भों और वैचारिक पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने तौहीद के विभिन्न आयामों और मानव जीवन के अलग-अलग पहलुओं को क़ुरआन की शिक्षाओं के आलोक में समझने के महत्व को स्पष्ट किया। उनके शोधपत्र ने उपस्थित लोगों को पुस्तक के विषयों और उसकी वैचारिक विशेषताओं को समझने में सहायता प्रदान की।
प्रोफेसर फ़ाइज़ा अब्बासी के विचार
प्रोफेसर फ़ाइज़ा अब्बासी ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए पुस्तक के विषयों और उसकी शैक्षणिक उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि तौहीद और मानव जीवन से जुड़े प्रश्नों को क़ुरआन की रोशनी में प्रस्तुत करना पाठकों को अपने विश्वासों, विचारों और जीवनशैली पर चिंतन करने के लिए प्रेरित करता है।
प्रोफेसर अज़ीज़ुद्दीन हुसैन का संबोधन
जामिया मिल्लिया इस्लामिया, दिल्ली के पूर्व शिक्षक प्रोफेसर अज़ीज़ुद्दीन हुसैन ने भी समारोह में अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने धार्मिक और क़ुरआनी पुस्तकों के अध्ययन तथा उनकी शैक्षणिक महत्ता को रेखांकित किया।
उन्होंने कहा कि ऐसी पुस्तकें मनुष्य को क़ुरआनी शिक्षाओं के साथ अपने संबंध को मजबूत करने और जीवन के विभिन्न पहलुओं को धार्मिक दृष्टिकोण से समझने का अवसर प्रदान करती हैं।
प्रोफेसर अली मोहम्मद नक़वी की अध्यक्षता
समारोह की अध्यक्षता अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के धर्मशास्त्र संकाय के पूर्व डीन प्रोफेसर अली मोहम्मद नक़वी ने की। उन्होंने इस प्रकार के आयोजनों को विश्वविद्यालयों में शोध, लेखन और गंभीर अध्ययन की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने पुस्तक के महत्व को व्यापक शैक्षणिक और धार्मिक संदर्भ में देखने की आवश्यकता पर बल दिया।

डॉ. मौलाना रज़ा अब्बास ने किया संचालन
कार्यक्रम का संचालन डॉ. मौलाना रज़ा अब्बास ने किया। उन्होंने समारोह के विभिन्न चरणों को व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाया और वक्ताओं के संबोधनों के बीच समन्वय बनाए रखा।
अंत में डॉ. हैदर हुसैनी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने समारोह में उपस्थित अतिथियों, शिक्षकों, विद्वानों, विद्यार्थियों और अन्य प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। इसके बाद अतिथियों और श्रोताओं की उपस्थिति में पुस्तक ‘हबलुल वदूद’ का औपचारिक विमोचन किया गया।
समग्र रूप से यह समारोह क़ुरआनी शिक्षाओं, धार्मिक चिंतन तथा लेखन और शोध के महत्व को रेखांकित करने वाला एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक आयोजन रहा। उम्मीद जताई गई कि शबीह ज़हरा हुसैनी कानूनपुरी की यह पुस्तक विद्वानों, विद्यार्थियों और आम पाठकों को क़ुरआनी ज्ञान के अध्ययन तथा उस पर चिंतन करने के लिए प्रेरित करेगी।
धन्यवाद ज्ञापन: डॉ. हैदर हुसैनी
समारोह के अंत में डॉ. हैदर हुसैनी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने कार्यक्रम में शामिल सभी सम्मानित अतिथियों, शिक्षकों, विद्वानों, श्रोताओं और अन्य प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उनके धन्यवाद ज्ञापन के साथ समारोह अपने समापन की ओर बढ़ा।
इसके बाद गणमान्य अतिथियों और श्रोताओं की उपस्थिति में ‘हबलुल वदूद’ पुस्तक का औपचारिक विमोचन किया गया। इस अवसर पर उपस्थित लोगों को लेखिका की इस साहित्यिक एवं शैक्षणिक कृति से परिचित होने का अवसर मिला।
वैज्ञानिक और धार्मिक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण प्रयास
‘हबलुल वदूद’ पुस्तक का विमोचन समारोह केवल एक पुस्तक के लोकार्पण तक सीमित नहीं था, बल्कि यह क़ुरआनी शिक्षाओं, धार्मिक चिंतन तथा लेखन और शोध के महत्व को उजागर करने वाला एक सार्थक शैक्षणिक आयोजन भी था। पुस्तक में विशेष रूप से तौहीद के विभिन्न आयामों और मानव जीवन की परिस्थितियों को पवित्र क़ुरआन की रोशनी में समझने का प्रयास किया गया है, जो इसे धार्मिक एवं वैचारिक अध्ययन में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए महत्वपूर्ण बनाता है।
इस समारोह में विभिन्न विद्वानों की भागीदारी और उनके संबोधनों ने पुस्तक के विषयों पर चिंतन के अनेक पहलुओं को सामने रखा। ऐसे आयोजन शैक्षणिक संवाद को बढ़ावा देने, लेखन कार्यों को प्रोत्साहित करने तथा विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं में पुस्तकों के प्रति रुचि विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

यह भी उल्लेखनीय है कि समारोह में बड़ी संख्या में शिक्षकों और विद्यार्थियों की उपस्थिति ने विश्वविद्यालय के शैक्षणिक वातावरण में ऐसी गतिविधियों के प्रति रुचि को दर्शाया। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के शिया धर्मशास्त्र विभाग की ओर से आयोजित यह कार्यक्रम धार्मिक एवं शैक्षणिक पुस्तकों को प्रोत्साहित करने तथा शोध और लेखन को बढ़ावा देने का एक सराहनीय उदाहरण है।
उम्मीद की जाती है कि लेखिका शबीह ज़हरा हुसैनी कानूनपुरी की यह कृति विद्वानों, विद्यार्थियों और आम पाठकों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी तथा पवित्र क़ुरआन की शिक्षाओं में रुचि रखने वाले लोगों को आगे भी अध्ययन और चिंतन के लिए प्रेरित करेगी।

कुल मिलाकर, ‘हबलुल वदूद’ पुस्तक का विमोचन समारोह एक सार्थक, गरिमापूर्ण और शैक्षणिक दृष्टि से महत्वपूर्ण आयोजन रहा, जिसने लेखन एवं शोध के महत्व को उजागर करने के साथ-साथ क़ुरआनी चिंतन और धार्मिक चेतना को बढ़ावा देने का संदेश भी दिया।
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